इश्क वो इबादत है
आंखो में हो आंसू
ओंठो पे मुशकान उभर आये
प्यार मे टूट कर मंजिल पर पहुंच जाये
महबूब के दीदार से दिल मे पाकीजगी का हो एहसास
और दिल से निकली हुई आहो मे हो दुआये
कितना ही क्यो न हो महबूब फरेबी
फिर भी देखो जब उसे तो प्यार उमड आये
तेरा काम ही है आशनायी कृष्ण
बात तब है जब बेवफायी पर भी तुझको प्यार आये


