Sunday, May 6, 2007

गजल

१६-०१-१९९९

लोग कहते है की मोहब्बत में आबाद हुआ करते है
मैंने देखा है की बर्बादियों के भी समान हुआ करते है
यूं तो आशिकी में दिल को सुकून मिलाता है
लेकिन वहां दर्द व गम के सरे सामान हुआ करते है
मोहब्बत में पाकीज़गी का जिक्र सुना है हमने
मैंने देखा है की जिल्लत के भी सारे सामान हुआ करते है
इश्क की कार्गुज़ारिओं का बयाँ क्या करे कृष्ण
इश्क में हर लम्हा लोग कुर्बान हुआ करते है
दीवानों की जुबानी है माशूक बडे दिलकश होते हैं
ठीक कहता हूँ अगर उनके पास दिल तोडनें के भी औजार हुआ करते हैं

कृष्ण कुमार मिश्र

Krishna Kumar Mishra
77, Canal Road Shiv Colony Lakhimpur Kheri-262701
Uttar Pradesh
India
cellular-091-9451925997

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